#उत्तराखंड! तेरा साथ छन हम!PAPPU KARKI HIT SONG !LALI HO! UTTARAKHAND DI...
#उत्तराखंड! तेरा साथ छन हम एक यादगार कार्यक्रम
देवभूमि लोक कला उद्दगम टीम द्वारा आयोजित चॅरिटी सांस्कृतिक कार्यक्रम 30 जुलाई 2016 नेरुल नवी मुंबई
#UTTARAKHAND DISASTERS RELIFE PROGRAME MUMBAI
PAPPU KARKI HIT SONG !LALI HO! !!UTTARAKHAND TERA SAATH CHANN HUM!!
#उत्तराखंड में 30 जून 2016 को बादल फटने और भयंकर वर्षा के कारण से चमोली और पिथौरागढ़ के बस्तडी गाँव (कनालिछीणा) में भारी तबाही हुई इस प्रलयकारी आपदा में कई बच्चों ने अपने माँ बाप तो कई बुजुर्गो ने अपने बच्चों को हमेशा के लिए खो दिया उन जिंदा लोगों का असहनीय और कभी ना भुला पाने वाला दर्द था उस दर्द से जूझ रहे अपनों का दर्द पहाड़ तक ही सीमित नही रहा देश विदेशों में भी पहाड़ के लोगों ने इस दैवीय घटना और आपदाग्रस्त लोगों की दशा पर दुखः व्यक्त किया!
मुंबई में देवभूमि लोक कला उद्दगम (चॅरिटेबल ट्रस्ट) जो मुंबई निवासियों उत्तराखंडी कलाकारों की एक संगठित टीम है जो समय-समय पर मुंबई महानगर में उत्तराखंडी धार्मिक सामाजिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिये समाज को संगठित करना जरूरतमंदों की मदद एवं उत्तराखंडी लोक कला संस्कृति को बढ़ावा देने हेतु कार्यक्रम करते हैं !
उत्तराखंड आपदा पीढितों के दर्द को महसूस कर सभी मुंबई प्रवासियों ने मिलकर कार्यक्रम को सफल बनाया देवभूमि लोक कला उद्दगम टीम द्वारा आयोजित 'उत्तराखंड तेरा साथ छन हम' चॅरिटी कार्यक्रम में उत्तराखंड के 3 सुप्रसिद्ध लोक गायक स्वर्गीय श्री पप्पू कार्कीजी, श्री गोविन्द दिगारीजी,खुशी जोशीजी एवं सुप्रसिद्ध संगीतकार श्री राजेन्द्र चौहानजी उत्तराखंड से मुंबई इस चॅरिटी कार्यक्रम में उपस्थित रहने और प्रफोर्मेंस के जरिये पहाड़ आपदा पीढितों के लिये सहायता जुटाने में आपका महत्वपूर्ण योगदान रहा जिसके लिए इन 4 कलाकारों ने कोई मानधन नही लिया यह इन चार महाँन कलाकारों की देवभूमि लोक कला उद्दगम टीम के सभी कलाकारों की एवं समस्त प्रवासी उत्तराखंडियों की बस्तडी गाँव के उन 21 असहाय परिवारों के दर्द तक पहुंच कर यथासंभव मदद और इस विनाशलीला में अपनों से बहुत दूर चले गये मृतकों के लिए भावपूर्ण श्रद्धांजली थी मुंबई में कार्यक्रम के बाद देवभूमि लोक कला उद्दगम टीम के सदस्य पिथौरागढ़ के बस्तडी गाँव में जाकर उन अपनों की मदद के लिए पहुंच पाये जो किसी सहारे की राह देख रहे थे!
उत्तराखंड के 4 महाँन कलाकार स्वर्गीय श्री पप्पू कार्कीजी, गोविंद दिगारीजी, खुशी जोशी दिगारीजी एवं संगीतकार श्री राजेन्द्र चौहानजी का देवभूमि लोक कला उद्दगम टीम और समस्त उत्तराखंड की तरफ से बहुत-बहुत धन्यवाद🙏💐😊
पप्पू कार्की.प्रवेंद्र सिंह कार्की
जन्म ३० जून १९८४ शैलावन, पिथौरागढ़, उत्तराखण्ड मृत्यु ९ जून २०१८ (३४)
हैड़ाखान, नैनीताल, उत्तराखण्ड मृत्यु का कारण सड़क दुर्घटना व्यवसाय गायक
जीवनसाथी कविता कार्की बच्चे १
प्रवेंद्र सिंह कार्की (३० जून १९८४ – ९ जून २०१८), जो पप्पू कार्की के नाम से प्रसिद्ध थे, उत्तराखण्ड के एक प्रसिद्ध कुमाऊँनी लोकगायक थे।
पप्पू कार्की का जन्म ३० जून १९८४ को पिथौरागढ़ जनपद के सेलावन ग्राम में किशन सिंह कार्की तथा कमला कार्की के घर हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राथमिक विद्यालय हीपा में, तथा आगे की शिक्षा जूनियर हाईस्कूल प्रेमनगर तथा राजकीय हाईस्कूल भट्टीगांव में प्राप्त की।[1] परिवार की आर्थिक हालत खराब होने के कारण हाईस्कूल के बाद पढ़ाई छोड़ वह दिल्ली में प्राइवेट नौकरी में लग गए। २००३ से २००६ तक दिल्ली में पहले एक पेट्रोल पंप में, फिर प्रिंटिंग प्रेस में, और अंत में एक बैंक में चपरासी की नौकरी करी, जिसके बाद वह रुद्रपुर आ गए, जहाँ दो साल उन्होंने डाबर कपंनी में काम किया।
कैरियर
पप्पू कार्की की बचपन से ही संगीत में रुचि थी। पांच साल की उम्र से वह पारम्परिक न्योली लोकगीत गाने लगे थे। इसके अतिरिक्त होली, रामलीला एवं स्कूल के राष्ट्रीय पर्वों में भी वह हमेशा भाग लेते थे। १९९८ में पप्पू ने अपना पहला गीत अपने गुरु, कृष्ण सिंह कार्की की जुगलबंदी में रिकार्ड किया था।[3] यह गीत उनकी एलबम ‘फौज की नौकरी में’ का था। इसके बाद २००२ में उन्होंने एक अन्य एलबम ‘हरियो रूमाला’ में भी गीत गाए। २००३ में पप्पू ने अपनी पहली एलबम ‘मेघा’ से खुद के गाए गीतों के एल्बमों की शृंखला शुरू की, लेकिन वे कुछ ख़ास सफल नहीं हुए। इसके बाद वह दिल्ली चले गए, जहाँ २००६ में उन्होंने उत्तराखण्ड आइडल प्रतियोगिता में भाग लिया, और प्रथम रनरअप घोषित हुए थे
मृत्यु
९ जून २०१८ की सुबह कार्की नैनीताल जनपद के गौनियारों में आयोजित युवा महोत्सव में अपने चार साथियों के साथ प्रस्तुति देकर हल्द्वानी लौट रहे थे।लगभग पांच बजे हैड़ाखान मंदिर के पास पहुंचते ही उनकी कार अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जाने के बाद दूसरी सड़क की तरफ लुढ़क गई।दुर्घटना में कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई, और उनकी तथा उनके दो साथियों की मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद १० जून को थल में रामगंगा घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया।उनके शोक में १० जून को पांखू और थल के बाजार बंद रहे।
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